अगर आप सोने में अनेकों तरीके से निवेश कर सकते हैं जिसपर अलग-अलग Tax के नियम लागु होते हैं, विस्तारपूर्वक जाने सोने पर निवेश करने का तरीका। 

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दिवाली आने पर लोग सोने की खरीदारी जोरों से करतें है. इस दौरान सबसे ज्यादा ख़रीदे जाने वाली चीज़ों में से एक है. दिवाली के मौके पर सोने में निवेश करना वैसे भी शुभ माना जाता है, हालांकि जैसे मार्किट में उतार-चढ़ाव होता है उसी तरह सोने के दामों में भी उतार-चढ़ाव होता रहता है, ऐसे में अगर सोने में निवेश करने का सोच रहे हैं तो आज हम आपको बताएंगे की आप सोने में कितने तरीकों से निवेश कर सकते हैं और इनपर पड़ने वाले टैक्स के क्या नियम हैं, चलिए जानते हैं। 

Digital Gold में निवेश
गोल्ड में निवेश की सूचि में पहला है Digital Gold Investment, बहुत से ऐसे ऑनलाइन ऐप्स है जो आपको ऑनलाइन डिजिटल गोल्ड में निवेश करना का ऑप्शन देते है. इसके साथ ही बैंक भी आपको डिजिटल गोल्ड बेचते हैं, जहाँ आप ऑनलाइन मात्र 1 रु से अपना निवेश शुरू कर सकते हैं. आपको यहां बस ऑनलाइन पैसा लगाकर गोल्ड खरीदना होता है जो आपको मार्किट में चल रहे गोल्ड रेट पर ही मिलता है और कीमत बढ़ने के साथ उसकी भी कीमत बढ़ती है इससे आपको स्टोरेज की भी फिक्र नहीं होगी, ऐसे में डिजिटल गोल्ड में निवेश करना आपके लिए एक बेहतर ऑप्शन हो सकता है। 

Physical Gold में निवेश :
अधिकतर लोग फिजिकल गोल्ड ही खरीदना पसंद करते है जो एक ट्रेडिशनल इन्वेस्टमेंट है. दिवाली के इस अवसर पर आप ज्वैलरी, गोल्ड कॉइन या गोल्ड बार खरीद सकते हैं. Physical Gold खरीदने पर आपको स्टोरेज देखना होगा साथ ही गोल्ड मेकिंग चार्ज, GST का टैक्स भी भरना पड़ेगा। 


Paper Gold में निवेश
Paper Gold के जरिए आप गोल्ड में निवेश करने वाले म्यूचुअल फंड, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में, या गोल्ड ETF या गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड में निवेश करते हैं. यह भी आपके लिए एक बेहतर ऑप्शन हो सकता है जो आपको भविष्य में बेहतर रीटर्न दे सकता है। 

अलग-अलग गोल्ड इन्वेस्टमेंट पर पड़ने वाला टैक्स और नियम?
1. Digital Gold Tax:
नियमों के अनुसार डिजिटल गोल्ड में 36 महीने से कम समय के लिए निवेश रखने पर सीधा टैक्स नहीं लगता. अगर 36 महीने से ऊपर रखते हैं तो इसके ऊपर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है, यानी आपको डिजिटल गोल्ड पर मिलने वाले रिटर्न पर 20% टैक्स के साथ सरचार्ज और 4 फीसदी सेस देना पड़ता है। 

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2. Physical Gold Tax:
फिजिकल गोल्ड खरीदने पर आपके उसके ऊपर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) का नियम लगता है. यानि अगर आप 36 महीने से कम समय के लिए गोल्ड रखकर उसे बेचते है तो इसके ऊपर मिलने वाले रिटर्न को आपकी इनकम में जोड़ा जाएगा जिसका कुल टैक्स आपके लायबिलिटी के हिसाब से जोड़ा जायेगा जो भी टैक्स रेट होगा, फिर आपको उस हिसाब से टैक्स भरना पड़ेगा। लेकिन अगर आप 36 महीने की अवधि से ज्यादा समय तक सोना रख के बेचते हैं आपको इसपर सीधे 20 फीसदी टैक्स के साथ सरचार्ज और 4 फीसदी सेस देना होता है. इसके अलावा आपको फिजिकल गोल्ड खरीदते समय GST टैक्स भी देना पड़ता है।


3. Paper Gold Tax:
गोल्ड में निवेश करने वाले म्यूचुअल फंड और गोल्ड ETF पर टैक्स के नियम फिजिकल गोल्ड जैसे ही हैं, लेकिन सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर टैक्स के अलग नियम बनाये गए हैं. गोल्ड बॉन्ड में निवेश पर आपको ब्याज मिलता रहता है, जो कि आपके Other Source से Income देने का काम करता है, जिसपर टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है. यदि आप बॉन्ड में आठ सालों के लिए निवेश करते है तो इसके बाद में आपको जो भी रिटर्न मिलता है, वो टैक्स फ्री होता है. अगर आप तय समय सिमा से पहले बॉन्ड बेचते है तो आपको रिटर्न पर अलग-अलग टैक्स रेट देना पड़ता है. नियमो के अनुसार SGB में 5 सालों का लॉक-इन पीरियड होता है, अगर आप इन 5 सालों के बाद और मैच्योरिटी के पहले इसे बेचते हैं तो इसपर आपको लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ता है।